यमुनानगर

जिंदगी की जंग हार गया अंबाला जिले का मासूम निरवैर

जिंदगी की जंग हार गया अंबाला जिले का मासूम निरवैर!
देश से करोड़ो दुआएं बेअसर रहीं । करोड़ों आंखें जो कल से रो रही थीं, आज हमेशा के लिए पथरा गईं। खेत के उस 220 फुट गहरे उस काल के अंधेरे कुएं से निरवैर को बाहर तो निकाला गया… लेकिन ना जाने वो सांसें कब का छोड़ चुका था।
एनडीआरएफ, सेना और प्रशासन के जांबाजों ने रात-दिन एक कर दिया, टनल के भीतर मौत से एक-एक इंच की लड़ाई लड़ी गई। बाहर खड़ी मां की सिसकियां और पिता की पथराई आंखें बस एक चमत्कार का इंतजार कर रही थीं। लेकिन अफ़सोस उम्मीदों का वो आखिरी दीया भी बुझ गया।जिस मासूम की किलकारियों से घर का आंगन गूंजता था, वो हमेशा के लिए अब खामोश हो गया।
यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, यह उस लापरवाही का नतीजा है जो मासूमों की बलि लेती है। खुले छोड़े गए ये बोरवेल न जाने और कितनी जिंदगियां लीलेंगे? आज हर आंख नम है, हर दिल रो रहा है।
भगवान मासूम निरवैर की आत्मा को शांति दे और उसके माता-पिता को यह असह्य दुख सहने की शक्ति दे।

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